विद्यालय संरक्षण समूह

बच्चों की सुरक्षा एवं संरक्षा हेतु प्रदेश सरकार की नई पहल

हर विद्यालय में बनेगा ‘‘विद्यालय संरक्षण समूह’’

विद्यालय संरक्षण समूह

प्रदेश में बच्चों की सुरक्षा करने एवं बाल अपराधो तथा असंवैधानिक कृत्यों से किशोर बालकों को रोकने हेतु प्रदेश सरकार ने कई महत्वपूर्ण कदम उठाये है। यद्यपि पुलिस द्वारा इस दिशा मे प्रयास किये जा रहे है किन्तु इस सामाजिक समस्या केे निदान के लिए सभी वर्गो का सहयोग लिया जाना समय की मांग एवं आवश्यकता है।

अपराधी प्रवृत्ति के व्यक्तियों द्वारा किशोरों का शारीरिक एवं मानसिक शोषण किये जाने संबंधी घटनाओ की प्रभावी रोकथाम तथा इस दिशा में बच्चों में जागरूकता पैदा करने हेतु हर विद्यालय में ‘‘विद्यालय संरक्षण समूह’’ बनाने के प्रयास शासन के निर्देश पर शुरू किये गये है। प्रत्येक जिले के पुलिस प्रमुखों को इसके गठन की जिम्मेदारी दी गई है। इस समूह को बनाने अथवा इसमें जुड़ने के लिये किसी भी प्रकार का दबाव बनाये बिना संगठनात्मक प्रयास किये जाने के गंभीर प्रयास प्रदेश सरकार द्वारा किये जा रहे है।

प्रदेश स्तर पर इस कार्य के सुचारू एवं सुव्यवस्थित संचालन हेतु पुलिस महानिदेशक, महिला सम्मान प्रकोष्ठ को इसका नोडल अधिकारी नामित किया गया है। इन्हे स्थानीय निकायों, शैक्षिक संस्थाओं व शिक्षा विभाग से समन्वय स्थापित करते हुये विद्यालय संरक्षण समूह के प्रयास को कार्यान्वित कराये जाने का दायित्व सौंपा गया है। नोडल अधिकारी की यह भी जिम्मेदारी दी गई है कि वह ‘‘लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण नियम 2012’’ का प्रचार प्रसार कराये। शैक्षिक संस्थानों का उत्तरदायित्व निर्धारण, सुरक्षा के संबंध में शिक्षा विभाग के अधिकारियों से समन्वय कर जरूरी निर्देश जारी कराने आदि का कार्य भी इनके द्वारा किया जायेगा।

विद्यालय संरक्षण समूह की अध्यक्षता उस संस्था के प्रमुख अथवा अभिभावक-अध्यापक संघ के अध्यक्ष द्वारा की जायेगी। समूह का सचिव स्थानीय थानाध्यक्ष को बनाया गया है तथा संयुक्त सचिव स्थानीय थाने के थानाध्यक्ष द्वारा नामित पुलिस अधिकारी होगा। समिति के सदस्य के रूप में सभासद, वार्ड काउन्सलर, विद्यालय का छात्र नेता, दो इच्छुक अभिभावक, एक स्थानीय सम्भ्रांत व्यापारी, एक सम्मानित आॅटो चालक, एक जागरण समिति का प्रतिनिधि एवं उस क्षेत्र के कुछ सम्भ्रांत निवासी हो सकते है।

इस समूह द्वारा विद्यालय क्षेत्र एवं उसके आस-पास सुरक्षित यातायात सुनिश्चित करने के संबंध में कार्यवाही की जायेगी। विद्यालय क्षेत्र एवं उसके आस-पास मादक पदार्थो की बिक्री एवं उसकी उपलब्धता के संबंध में सूचनायें एकत्र की जायेंगी तथा तम्बाकू उत्पाद पान मसाला एवं मदिरा (एल्कोहल) आदि के संबंध में सूचनायें प्रसारित करायी जायेगी।

समूह द्वारा विद्यालय के उन बच्चों के संबंध में भी सूचनायें एकत्र की जायेंगी जो कक्षा समय में गायब रहते है अथवा कक्षा में रहने से कतराते है। बच्चों के साथ घुलमिलकर उन्हें अवैधाानिक/अनैतिक गतिविधियों में लगाकर उनका शोषण करने वाले संदिग्ध व्यक्तियों पर भी इस समूह द्वारा नजर रखी जायेगी। पुलिस प्रमुख इसके लिये स्थानीय निकायों, संस्थानों एवं शिक्षा विभाग के अधिकारियों से समन्वय स्थापित कर सकते हैं।

उल्लेखनीय है कि स्कूल जाने वाले बच्चों की सुरक्षा हेतु माननीय सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष एक याचिका में अनुरोध किया गया था कि बाल सुरक्षा अधिकार के संबंध में स्टेटअरी कानून के नियम एवं रेग्यूलेशन तथा गाइड लाइन जारी किये जाये। शासन द्वारा की जा रही उक्त समस्त कार्यवाही इसी की एक कड़ी है।

प्रदेश के गृह विभाग द्वारा इस संबंध में पुलिस महानिदेशक, प्रमुख सचिव माध्यमिक शिक्षा एवं बेसिक शिक्षा विभाग तथा प्रमुख सचिव, महिला एवं बाल विकास को आवश्यक निर्देश जारी किये गये है।

Back to Top